सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या पर:
तनाव के उन क्षणों में मजबूत लोग भी आत्महत्या कर लेते हैं..
वो लोग जिनके पास सब कुछ है
शान ... शौकत ... रुतबा ... पैसा .. इज्जत
इनमें से कुछ भी उन्हें नहीं रोक पाता ..
तो फिर क्या कमी रह जाती है ???
कमी रह जाती है उस ऊँचाई पर
एक अदद दोस्त की
कमी होती है उस मुकाम पर
एक अदद राजदार की
एक ऐसे दोस्त की जिसके साथ "चांदी के कपों" में नहीं
किसी छोटी सी चाय के दुकान पर बैठ
सकते ..
जो उन्हें बेतुकी बातों से जोकर बन कर हंसा पाता ...
वह जिससे अपनी दिल की बात कह हल्के हो सके..
वह जिसको देखकर
अपना स्ट्रेस भूल सके
वह दोस्त
वह यार
वह राजदार
वह हमप्याला
उनके पास नहीं होता
जो कह सके तू सब छोड़ ... चाय पी मैं हूं ना तेरे साथ ...
और आखिर में
यही मायने कर जाता है...
सारी दुनिया की धन दौलत
एकतरफ...सारा तनाव एक तरफ ..
वह दोस्त वह एक तरफ !!!
लेकिन अगर आपके पास
वह दोस्त है
वह यार है
तो कीमत समझिये उसकी...
चले जाइए एक शाम उसके साथ
चाय पर ...
जिंदगी बहुत हसीन बन जाएगी......
याद रखिए आपके तनाव से यदि कोई लड़ सकता है तो वो है आपका दोस्त और उसके साथ की एक कप गर्म चाय !!!
: डरते थे कभी तन्हाई से बीमार न पड़ जायें,तनाव के उन क्षणों में मजबूत लोग भी आत्महत्या कर लेते हैं..
वो लोग
सभी दोस्तों को समर्पित 🌹
बहुत छाले हैं उसके पैरो में , कमबख्त उसूलों पर चला होगा |
इतनी क्यों सिखानें पर तुली हो जिंदगी , हमें कौन सी यहां सदियों गुजारनी हैं |
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