श्री संकटमोचन हनुमान जी
🙏🙏 श्रीसंकटमोचन हनुमानजी 🙏🙏
देश के ऐतिहासिक मंदिरों में शामिल काशी के संकट मोचन मंदिर का इतिहास करीब 400 साल पुराना है।संकटमोचन का मतलब है सभी कष्टों को हरने वाला। इसी मंदिर में श्री हनुमान जी ने राम भक्त गोस्वामी तुलसीदास को दर्शन दिए थे, जिसके बाद बजरंगबली मिट्टी का स्वरूप धारण कर यहीं स्थापित हो गए।
बताया जाता है कि संवत 1631 और 1680 के बीच इस मंदिर को बनवाया गया। इसकी स्थापना श्री तुलसीदास जी ने की थी। 1900 ई. में पंडित मदन मोहन मालवीय जी द्वारा मन्दिर को बनवाया गया जो कि वर्तमान स्वरूप में है ,
मान्यता है कि श्री तुलसीदास जी काशी में रह कर रामचरितमानस लिख रहे थे, तब उनके प्रेरणा स्त्रोत संकट मोचन श्री हनुमान जी थे।
तुलसीदास के बारे में कहा जाता है कि वे हनुमान के अभिन्न भक्त थे। एक बार तुलसीदास के बांह में पीड़ा होने लगी, तो वे उनसे शिकायत करने लगे। उन्होंने कहा कि 'आप सभी के संकट दूर करते हैं, मेरा कष्ट दूर नहीं करेंगे।' इसके बाद नाराज होकर उन्होंने "हनुमान बाहुक "लिख डाली। बताया जाता है कि यह ग्रंथ लिखने के बाद ही उनकी पीड़ा खुद ही समाप्त हो गई।
विशेषता - इस मंदिर की सबसे अद्भुत विशेषता यह है कि भगवान् हनुमानजी की मूर्ति की स्थापना इस प्रकार हुई है कि वह अपने प्रभु श्री रामचन्द्र जी की ओर ही देख रहे हैं, श्री राम जी के ठीक सीध में संकटमोचन महाराज का विग्रह है। संकटमोचन जी की मूर्ति मिट्टी की है।
महाबलि को प्रसाद में शुध्द घी के बेसन के लड्डुओं का भोग लगाया जाता है।
यह मन्दिर दुर्गाकुंड से लंका जाने वाले रास्ते पर दाहिने हाथ पर स्थापित है। मुख्य मन्दिर में हनुमान जी की सिंदूरी रंग की अद्वितीय प्रतिमा स्थापित है ,
जय श्री संकट मोचन हनुमान ,
।। जय श्री राम 🙏🚩
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