सुग्रीव बाली युद्ध एवम् बाली वध प्रसंग

सुग्रीव बाली युद्ध एवम् बाली वध प्रसंग



श्री रामचन्द्र जी ने सुग्रीव बाली के युद्ध के दौरान ही बाली को अपने बाणों से में डाला, घायल बाली पूछते हैं;

*मैं बैरी सुग्रीव पियारा, कारण कवन नाथ मोहि मारा*।अर्थात मैं आपका बैरी कैसे हुआ,मैंने तो आपका कोई अहित नहीं किया।और सुग्रीव ने आपका कौन सा हित किया,जो मैं बैरी और सुग्रीव प्रिय हो गया और आपने मुझे मार डाला।रामजी ने उत्तर दिया:-
*अनुज बधू भगिनी सुत नारी।*
*सुनु सठ कन्या सम ए चारी॥*
*इन्हहि कुदृष्टि बिलोकइ जोई।*
*ताहि बधें कछु पाप न होई॥*
अब बाली कहता है कि चलो ठीक है मैं इसलिए बैरी हो गया।पर सुग्रीव मित्र कैसे हुआ,अब ये बताओ।तो अब रामजी कह रहे हैं:-
*मूढ़ तोहि अतिशय अभिमाना, नारि सिखावन करेसी न काना*
अरे मूर्ख तुझे इतना अभिमान कि तूने अपनी पत्नी की बात को न माना।जो सत्य कहती थी कि वे सर्वशक्तिमान है।सुग्रीव उनसे मिल गया अर्थात उनकी शरण में जा चुका है।रामजी की प्रतिज्ञा है कि जो मेरी शरण में आ चुका है मेरा बन गया है,उसका बैरी मेरा बैरी है और उसका मित्र मेरा मित्र है।
परन्तु बाली ने कहा कि राम जी तो समदर्शी है उनका न कोई शत्रु है न मित्र।परन्तु यहाँ पर विचारणीय है कि बाली की बात सत्य है कि राम समदर्शी है।निर्गुण रामजी के लिए यह बात सत्य है।परन्तु यह राम जी तो सगुन रूप में हैं:-
*अगुण अरूप अमान एक रस,राम सगुण भये भगत प्रेम बस*
*राम सदा सेवक रुचि राखी,वेद पुराण साधु सुर साखी*

सगुण राम समदर्शी नहीं है, यह भक्तों के मित्र और भक्तों के बैरी के शत्रु है।
*जो अपराध भगत कर करइ, राम रोष पावक सो जरइ*

अंत में राम जी ने भी बाली से यही कहा कि:-
*मम भुजबल आश्रित तेहि जानी,मारा चहसि अधम अभिमानी*
मेरे आश्रित जो हो जाये, अरे अधम अभिमानी तू उसे मारना चाहता है इसलिए मैंने तुझे मारा।
मेरे राम जी ऐसे है कि भक्त के अपराधी को वो क्षमा नही करते,अवश्य दंड देते हैं।सुग्रीव ने भी कहा था कि अब आप बाली को न मारो,क्योंकि बाली तो हमारा परम हितैषी है,उसी के कारण तो आप हमें मिले।आप सब दुःखो का हरण करने वाले और परमानंद प्रदान करने वाले हैं।
हाँ इतनी कृपा जरूर कर दीजिए कि:-
*अब प्रभु करहु एहि भांति,सब तजि भजन करूँ दिन राति*
तब राम जी कहते हैं कि तुम जो कह रहे हो,वह सब सत्य है परन्तु मेरे वचन कभी असत्य नही होते,मैं भक्त के अपराधी को अवश्य दंड देता हूँ।
भक्त भी यदि कहे कि उसे क्षमा कर दो,फिर भी मैं उसे क्षमा नही करता।मैं बाली को अवश्य मारूँगा।
अंत मे राम जी ने बाली को मारा भी।

जय श्री राम जय श्री हनुमान जी
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